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पहलवान सुशील का SGFI अध्यक्ष पद से इस्तीफा

पहलवान सुशील का SGFI अध्यक्ष पद से इस्तीफा
  • पहलवान सुशील का इस्तीफा
  • परिवारवाद का भी लगा आरोप
  • कौन है SGFI का असली हकदार
  • अधिकारिओं में भी निराशा
  • SGFI खेलों के आयोजन का प्रयास

लगता है पहलवान सुशील कुमार के बुरे दिन उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। जहां एक तरफ उनपर एक तरफ हत्या का मामला चल रहा है वहीं दूसरी तरफ SGFI को लेकर भी उनपर फिर से आरोप लगने शुरू हो गए हैं।

SGFI के एक गुट का कहना है कि पहलवान सुशील कुमार अपने एक सहायक कन्हैया गूर्जर के द्वारा SGFI का संचालन कर रहे हैं। इस गुट का आरोप है कि कन्हैया गूर्जर पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और सुशील कुमार की अनुपस्तिथि में वह एसजीऍफ़आई चला रहा है।

पहलवान सुशील का इस्तीफा

इंडिया 24×7 न्यूज़ के सूत्रों के अनुसार पहलवान सुशील कुमार ने SGFI अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों की माने तो यह इस्तीफा उनकी गिरफ्तारी के बाद के कुछ दिनों का दिखाया गया है। हालांकि इस इस्तीफे की सार्वजनिक तौर पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है इसलिए ऐसी खबरों के चलते उनके अपने ही गुट में संशय की स्तिथि बनी हुई है।। उनके इस्तीफे के बाद खाली अध्यक्ष पद पर अभी कोई नियुक्ति भी नहीं की गयी है। बताया जाता है कि अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति या चुनाव कराए जाने तक सुशील गुट के SGFI उपाध्यक्ष श्री अत्तरपाल सिंह ही कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे।

SGFI अध्यक्ष वी रंजीत गुट का कहना है कि सुशील कुमार ने अपने सेलिब्रिटी होने का फायदा उठाया और मंत्रालय को गुमराह किया जिसके चलते मंत्रालय ने सुशील गुट को चुनाव करवाने की इजाज़त दी। मंत्रालय के इस पत्र को रंजीत गुट ने न्यालय में चुनौती दी है।

परिवारवाद का भी लगा आरोप

अभी तक राजनीतिक नेताओं पर परिवारवाद के आरोप लग रहे थे लेकिन खेल संघ भी परिवारवाद से अछूते नहीं रहे हैं। इस बार आरोप लगा है पहलवान सतपाल और सुशील कुमार पर। रंजीत गुट का कहना है की पहले सतपाल पहलवान ने 17 साल तक स्कूल गेम्स फेडरेशन पर राज किया और फिर अपने दामाद सुशील को अध्यक्ष पर पर बिठा दिया।

इसमें कोई शक नहीं है कि पिछले 20 साल से महाबली सतपाल स्कूल गेम्स फेडरेशन पर स्वयं काबिज़ हैं और फिर सुशील कुमार को अध्यक्ष बनाने में सफल रहे। लेकिन यह भी मानना होगा की इस दौरान इस संगठन ने नाम भी कमाया और एक बहुत बड़े और चर्चित खेल संगठन के रूप में उभर कर आया। यह बात अलग है फेडरेशन अच्छे और बुरे दोनों वजह से चर्चा में रही। बात जहां तक सुशील कुमार की है तो कभी सुशील का सेलिब्रिटी होना फेडरेशन के लिए गर्व की बात हुआ करती थी वहीँ आज उनका नाम ह्त्या मामले से जुड़ने से School Games Federation of India पर भी आंच आई है। शायद पहलवान सुशील का इस्तीफा इसे कमी करने में कामयाब हो।

कौन है SGFI का असली हकदार

SGFI पर सुशील गुट और रंजीत गुट दोनों ही अपनी अपनी दावेदारी जता रहे हैं। एक तरफ सुशील गुट जिसका मानना है कि खेल मंत्रालय ने उन्हें चुनाव करवाने कि इजाज़त दी थी और उनका चुनाव स्पोर्ट्स कोड के तहत करवाया गया है जबकि तमिलनाडू में रंजीत गुट द्वारा करवाया गया चुनाव ना तो स्पोर्ट्स कोड के तहत करवाया गया और ना ही उसमे तत्कालीन SGFI अध्यक्ष (सुशील कुमार) की अनुमति ली गई थी।

रंजीत गुट का कहना है कि तमिलनाडू में कराए गए चुनाव सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत कराए गए। खेल मंत्रालय के स्पोर्ट्स कोड के अनुसार कोई भी खेल संगठन या तो सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत या फिर कॉर्पोरेट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि क्योंकि SGFI आगरा में सोसाइटी एक्ट के अंतरगर्त पंजीकृत है। क्योंकि आगरा पंजीकरण कार्यालय ने तमिलनाडु में हुए चुनाव को मान्यता प्रदान कर दी है इसलिए उनका गुट ही SGFI चलाने का असली अधिकारी है।

दोनों गुटों के दावों के चलते छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की कई अदालतों में मामले लंबित हैं।

अधिकारिओं में भी निराशा

जाहिर है पहलवान सुशील कुमार के जेल जाने के बाद से मार्च महीने में दिल्ली में हुए चुनावों में चुने हुए अधिकारी काफी आहत है। कोई भी अधिकारी सुशील कुमार के साथ में खड़ा हुआ दिखाई नहीं दे रहा। क्योंकि चुने गए सभी अधिकारी सरकारी पदों पर आसीन हैं इसलिए कोई भी अधिकारी क़ानून और पुलिस जांच की ज़द में नहीं आना चाहता, इसलिए सभी चुप्पी साधे हुए हैं।

चूंकि इस धड़े के सभी अधिकारी नए हैं और इस फेडरेशन की कार्यशैली से अनभिज्ञ हैं इसलिए इस धड़े के शांत बैठ जाने की सम्भावना भी प्रबल है। यदि ऐसा होता है तो रंजीत धड़ा अपना वर्चस्व बचाने और देश के बहुत बड़े खेल संगठन पर काबिज़ होने में कामयाब हो जायेगा।

SGFI खेलों के आयोजन का प्रयास

महासचिव अलोक खरे का कहना है कि कुछ अनाधिकृत लोग SGFI के बारे में भ्रम कि स्तिथि फैला रहे हैं जिसके चलते वर्तमान वस्तु स्तिथि कराने के लिए इस प्रेस वार्ता आयोजन किया गया है।

उन्होंने कहा कि तमिलनडु में हुए चुनाव SGFI के पंजीकृत सविधान के अनुरूप हुए और कानूनी रूप से वैध हैं। अंतरराष्ट्रीय स्कूल खेल महासंघ द्वारा तमिलनाडू में हुए हमारे चुनावों को मान्यता प्राप्त है और मंत्रालय से मान्यता के लिए यह अतिआवश्यक नियम हैं।

आलोक खरे ने कहा “विद्यार्थिओं की खेलकूद गतिविधियां प्रभावित ना हो इसके लिए शीघ्र ही भारत सरकार से दिशानिर्देश अनुसार SOP का पालन करते हुए राष्ट्रीय खेलों का का प्रयास किया जायेगा। रेफरी व् एम्पायर प्रशिक्षण भी आयोजित किया जायेगा। ओलिंपिक खेलों के साथ साथ भारतीय व् क्षेत्रीय खेलों कप भी जायेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां शुरू होने पर भारतीय खिलाड़िओं की सहभागिता हेतु प्रशिक्षण एवम अन्य क्रियाकलाप आयोजित किए जायेंगे। समस्त क्रियाकलापों के लिए एक वैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जायेगी जो स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की अधिकृत वेबसाइट www.sgfibharat.com पर उपलब्ध होगी। “

सुशील कुमार का गुट बिखर जायेगा या फिर किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को लाकर इस खेल संगठन की गरिमा को बचाने में कामयाब होगा ? क्या रणजीत गुट कानूनी लड़ाई जीत पाएंगे ? क्या इस वर्ष रंजीत गुट स्कूल टूर्नामेंट करवा पाएंगे ? इन सभी सवालों के जवाब आज शायद किसी के पास नहीं हैं। इन सभी सवालों के जवाब तो वक्त की तिजोरी में कैद हैं लेकिन इतना अवश्य है की इस घमासान के चलते खिलाड़िओं का नुक्सान ज़रूर हो रहा है विशेषकर वो खिलाड़ी जो स्कूल से पास होकर कॉलेज चले जायेंगे।

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