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2024 लोकसभा की नींव गुजरात चुनाव है, पीएम और अमित शाह के गुजरात दौरे तेज़

गुजरात विधानसभा के चुनाव कुछ ही समय मे होने वाले है। अभी गुजरात से लेकर दिल्ली तक रणनीति बनाई जा रही है। पीएम मोदी के भी गुजरात के हर एक महिने में एक से दो दौरे होते है। भारतीय जनता पार्टी प्रचंड जीत के साथ चुनाव कैसे जीतेगी उस हिसाब से केन्द्रीय दिग्गज नेताओने माईक्रो प्लानिंग भी कर दीया है।

गुजरात हंमेशा राजकीय क्षेत्र में परीवर्तन का राज्य रहा है। यहीं से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीने बीजेपी के जीत की नींव दिल्ली में रखी थी। अभी गुजरात के बाद लोकसभा के चुनाव भी आ रहे है, लेकिन उससे पहले गुजरात की बडी लीड के साथ जीत हो यहीं केन्द्रीय नेतृत्व चाहता है, क्योंकी ईस से ही लोकसभा की नींव जुडी है। क्योंकी गुजरात के बाद पडोशी राज्य राजस्थान और हिमाचलप्रदेश के चुनाव आ रहे है। जिसमे गुजरात की बडी जीत अहम है।

इसलिए गुजरात चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव की नींव है। लेकीन जीस तरह बीजेपी यह जीत की ख्वाहीस रखती है उस से उलटा गुजरात में कई बडी जीत में पडकार भी है। जानिए क्यां है बीजेपी की तैयारीया और पडकार।

अभी से बीजेपी ने इन पांच राज्यों के नेताओं को 182 विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए उतारा

 भाजपा के चुनाव अभियान में गुजरात के विभिन्न जिलों में झारखंड, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के नेता, कार्यकर्ता अभियान में शामिल हो रहे हैं। गुजरात में बीजेपी की चुनावी रणनीति का सिलसिला तेज हो गया है। अन्य राज्य कार्यकर्ताओं को भाजपा ने प्रचार के लिए गुजरात में भेजा है। यूपी, राजस्थान के कार्यकर्ता गुजरात विधानसभा की 88 सीटों पर प्रचार कर रहे हैं। जिस में सौराष्ट्र की 48 सीटे और उत्तर गुजरात की 40 सीटों पर चुनाव प्रचार कर रहै है। इसके अलावा अहमदाबाद की 16 सीटों पर भी प्रचार करेंगे।

गुजरात में अब तक 149 सीटें जीतने का रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया

मार्च के महीने में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 राज्यों का चुनाव जीतकर गुजरात में रोड शॉ करके जीत का जश्न मनाया था। इस बार मिशन 182 गुजरात बीजेपी जो देख रही है उसमें पिछली बार बीजेपी का मिशन 151 सीटें जीतने का था। हालांकि अभी तक मिशन पूरा नहीं हो सका है। 149 सीटें जीतने का रिकॉर्ड माधव सिंह सोलंकी के नाम पर है, इस बार फिर से 150 प्लस सीटे जीतने का लक्ष्य है। यह पूरा होगा या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। चार राज्यों की जीत के बाद इसके जश्न के साथ ही गुजरात राज्य में चुनाव शुरू हो गया।

गुजरात चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की एक के बाद एक गारंटी बीजेपी पर भारी पड़ सकती है भारी

27 साल में कांग्रेस गुजरात में सरकार बनाने में सफल साबित नहीं हो पाई है, अब तक कांग्रेस का लक्ष्य केवल एक पार्टी के खिलाफ जीत हासिल करना था, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी 182 विधानसभा में अपने उम्मीदवार उतार रही है। जिस में कुछ उम्मीदवार घाषित भी होने शुरु हो गये है। इस वजह से जो मतदाता कांग्रेस और भाजपा से असंतुष्ट हैं, वे तीसरे पक्ष को वोट दे सकते हैं। साथ ही आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल द्वारा मुफ्त बिजली, रोजगार, शिक्षा जैसे मुद्दों पर एक के बाद एक दी गई गारंटी भारी पड़ सकती है। अरविंद केजरीवाल के गुजरात दौरे एक के बाद एक हो रहे हैं जिसका असर गुजरात में चुनाव पर पड़ रहा है। क्योंकी आप की चर्चा भी लोगो कर रहे है।

गुजरात में पाटीदार सरकार से खफा हैं, पाटीदारो का 71 सीटों पर है प्रभूत्व

गुजरात की 71 सीटों पर जब पाटीदारों का दबदबा है तो पास समितीने 23 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 2017 में, पाटीदारों के आरक्षण आंदोलन के परिणामस्वरूप, भाजपा को नुकशान सीटो के मामले में हुआ था और कांग्रेस पार्टी को इसका फायदा हुआ। लेकिन आरक्षण आंदोलन से उठी पास समिति इस बार फिर चुनाव से पहले सक्रिय हो गई है। गुजरात विधानसभा 2022 का चुनाव पाटीदार आरक्षण आंदोलन के 23 नेता लड़ेंगे।

कांग्रेस की पारंपरिक सीटें भी बीजेपी के लिए चुनौती

कोंग्रेस सालों से कुछ सीटें जीत रही है। उसमें भी आदिवासी पारंपरिक मतदाताओं का फायदा कांग्रेस को हंमेशा से ही मिला है। इसके अलावा उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के कुछ इलाकों में जहां बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा, वहीं इस बार पारंपरिक सीटे भी बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण हैं।

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