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खेल संगठनों को लेकर उच्च न्यायालय का सख्त आदेश

हाल ही में एक खिलाड़ी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए खेल संगठनों को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय का सख्त आदेश आया। एक महत्वपूर्ण फैसले में, मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को आदेश जारी किया कि अब से, राज्य(तमिलनाडु) में सभी स्पोर्ट्स क्लबों, संघों और महासंघों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पदों पर राजनेता या व्यापारी नहीं बल्कि केवल खिलाड़ियों को ही होना चाहिए।

न्यायमूर्ति आर. महादेवन के आदेशानुसार जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए एथलीटों का चयन योग्यता के आधार पर सख्ती से किया जाना चाहिए। खिलाड़ियों का चयन चयन समितियों की निर्णय लेने की शक्तियों के दायरे में होना चाहिए और चयन समिति में केवल खिलाड़ी ही होने चाहिए।

न्यायाधीश ने यह स्पष्ट किया कि सभी चयन एक ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली को लागू करने के बाद किए जाने चाहिए, और राज्य के प्रत्येक खेल संगठन को अपनी वेबसाइट पर ऐसे आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रत्येक खिलाड़ी पर खर्च की गई राशि का विवरण प्रकाशित करना चाहिए।

खेल क्लबों और संघों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे खिलाड़िओं के लिए आबंटित और खर्च किए गए धन के विवरण के अलावा केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान का अपनी वेबसाइट पर खुलासा करें।

राज्य सरकार कर सकती हैं दंडात्मक कार्रवाई

इसके अलावा, खेल संगठनों का राज्य सरकार से पंजीकरण अनिवार्य बनाते हुए, अदालत ने क्लबों, संघों और महासंघों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने का अधिकार दिया, जो बाहरी विचारों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करते हैं।

अदालत ने आदेश दिया कि भाई-भतीजावाद, पक्षपात आदि के संबंध में किसी भी शिकायत का एक सप्ताह के भीतर निपटारा किया जाना चाहिए, और इस विषय पर एक व्यापक कानून बनाने का सुझाव दिया।

न्यायमूर्ति महादेवन ने आदेश दिया कि उनके द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाना चाहिए, जब तक कि राज्य विधायिका इसी तरह के कानून के साथ नहीं आती।

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