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कुर्ता और कार्यकर्त्ता

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कुर्ता और कार्यकर्त्ता

नाम -छेदी यादव, उम्र – 55 वर्ष, पार्टी – समाज सुधार पार्टी, डिग्री – 10वीं पास, सन 1970 समाज सुधार पार्टी से प्रभावित होकर कुर्ता- पजामा पहना और फिर पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा, राजनीति की चाशनी में अपने आप को ऐसा डुबाया की कब जवानी चली गई पता भी नहीं चला।

जवानी के दिनों में जब कोई पूछता नेता जी शादी कब किजयेगा, मेरा जवाब एक ही होता था मैं पार्टी के लिए बना हूं ,देश की सेवा करूंगा। तन मन धन सबकुछ पार्टी के लिए समर्पित कर दिया हू। मध्यम परिवार में जन्मे छेदी यादव कुर्ते पजामे की हनक में किसी की नहीं सुनता। यहां तक कि उनके मा – बाप पढ़ने – लिखने बोलते तो उल्टा उन्हें है समझाता नेता बनने के लिए डिग्री की जरूरत नहीं है।

एक दिन की बात है छेदी यादव रोड किनारे कुर्ता खोलकर उसे बार – बार निहार रहा था, तब उसकी उम्र 50-55 के करीब हो चुकी थी, मैं उसी रास्ते से गुजर रहा था। जैसे ही उन पर नज़र पड़ी मैंने गाड़ी रोक दी। पास गया और उनसे पूछा क्या हुआ नेता जी ये कुर्ता खोलकर नंगा बदन क्या कर रहे हैं? नेता जी फूट फूट कर रोने लगे और बोले इस कुर्ते ने मेरा जिंदगी बर्बाद कर दी, सब कुछ लूट लिया। मैने पूछा ऐसा क्या हो गया ? तब उसने अपनी व्यथा सुनाई, कि आज सहरसा के पटेल मैदान में पार्टी का रैली थी, मै जैसे ही मंच पे चढ़ा युवा कार्यकर्ताओं ने मुझे मंच से ही उठा कर नीचे फेक दिया।

मैने पार्टी के लिए पूरा जीवन समर्पित किया और आज पार्टी ने मेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय किया। सन 2005 में मुझे अध्यक्ष जी ने आश्वासन दिया था टिकट तुम्हीं को देंगे परन्तु जब समय आया तो रामदेव सिंह को 5 करोड़ रुपया लेकर बेच दी। मैं तब भी दुखी नहीं हुआ था। भाषण समाप्त होते ही मैं अध्यक्ष जी से मिला, शिकायत की। अध्यक्ष जी बोल उठे अब आप बूढ़े हो गए है, संन्यास लेे लीजिए, अभी युवाओं का दौर है। रामदेव बाबू बगल में बैठे थे, बोल पड़े, साहेब इन्हे सलाहकार शिष्ट मंडल में रख लेते है, अध्यक्ष जी बोले ठीक है। परन्तु मैंने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। इसलिए यहां बैठकर इस कुर्ते को समझने की बार बार कोशिश कर रहा हूं और सोच रहा हूं काश इस कुर्ते के पीछे नहीं भागता और अपने मान मां-बाप का कहा मानता तो मेरा ये हला ना होता।

छेदी यादव बोलते बोलते फिर भावूक हो गए। मैं उनको अपने साथ लेकर आया, बगल में एक धर्मराज का मंदिर था वहीं उसकी कुटिया बना दी। अभी छेदी यादव ने धर्मराज के भक्ति भावना में अपने आप को समर्पित कर दिया है। हे, बिहार के युवा, भविष्य के कर्णधार कहीं तुम्हारा भी हाल छेदी यादव के जैसा न हो जाए, अपने आप को संभालो इस कुर्ते ने न जाने कितनो को बर्बाद कर दिया। भक्त नहीं भगत बनो।
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इस कहानी का सभी पात्र काल्पनिक है जिसका किसी नेता पार्टी से कोई लेना देना नहीं है।
लेखक – दीपक कुमार
सीनियर कर सहायक
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट,आनंद, गुजरात

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