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अंतरराष्ट्रीय स्कूल गेम्स के लिए चयन – फिर विवाद

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अंतरराष्ट्रीय स्कूल गेम्स के लिए चयन – फिर विवाद

India 24×7 News: फ्रांस में 14 -22 मई में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्कूल ग्रीष्मकालीन खेलों (ISF Gymnasiade School Summer Games) के लिए स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (School Games Federation of India – SGFI) रंजीत गुट को निमंत्रण पत्र मिला। इन खेलों में भाग लेने के लिए SGFI ने 8 फरवरी को एक पत्र जारी कर चयन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी थी।

रंजीत गुट द्वारा जारी इस पत्र पर आपत्ति जताते हुए विरोधी गुट के महासचिव विजय संतान ने पत्र खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के नाम लिखा गया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राजेश मिश्रा, रणजीत कुमार और आलोक खरे SGFI के नाम पर एक अनधिकृत संघ चला रहें हैं। साथ ही उनके द्वारा ये भी आरोप लगाया गया कि बिना कोई राष्ट्रीय ट्रायल के बस पैसा कमाने के मकसद से बच्चों की भर्ती की जा रहीं हैं।

इस मामले में हमारी बात रणजीत कुमार से हुई उनका कहना है कि उन्हें सीधा इंटरनेशनल स्पोर्ट्स ऑथोरिटी (ISF) से इन खेलों में भाग लेना का निमंत्रण आया है। उन्होंने सलेक्शन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। रणजीत जी का कहना है, उनका ध्यान अभी निष्पक्ष रूप से इस चयन प्रक्रिया को पूरा करने पर है, जिससे वह सबसे बेहतरीन टीम को फ्रांस के लिए भेज सकें।

क्या है नया विवाद

8 फरवरी को SGFI के कथित प्रेसीडेंट रणजीत द्वारा एक पत्र जारी किया गया था जिसमें ISF द्वारा फ्रांस में आयोजित होने वाले World School Gymansiade के लिए 18 से कम उम्र के छात्र छात्राओं की भर्ती प्रक्रिया और रेजिस्ट्रेशन को लेकर जानकारी थी। ISF द्वारा रणजीत सिंह को फ्रांस में होने वाले इस गेम के लिए आमंत्रित किया गया था।

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इसके बाद विजय सन्तन द्वारा 9 तारीख को एक पत्र खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के नाम लिखा गया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राजेश मिश्रा, रणजीत कुमार और आलोक खरे SGFI के नाम पर एक अनधिकृत संघ चला रहें हैं। साथ ही उनके द्वारा ये भी आरोप लगाया गया कि बिना कोई राष्ट्रीय ट्रायल के बस पैसा कमाने के मकसद से बच्चों की भर्ती की जा रहीं हैं।

विरोधी गुट इतने तक ही नहीं रुका, उन्होंने 14 फरवरी को भारत में फ्रांस दूतावास को एक पत्र के माध्यम से कहा गया कि फ्रांस में होने वाले इन खेलों के लिए जाने के लिए रणजीत सिंह द्वारा खेल मंत्रालय से कोई अनुमति नहीं ली गई है। जिसके चलते ये टूर को अनधिकृत करार दिया। इस पत्र में 2017 में निशा नेगी (फुटबाल खिलाड़ी) के साथ हुई दुर्घटना का भी जिक्र किया गया जिसकों SGFI के लापरवाही के चलते जान से हाथ धोना पड़ा था।

फ्रांसीसी दूतावास को लिखे पत्र में विजय संतान ने रंजीत गट को अनाधिकृत बताते हुए कहा कि इन खेलो के लिए खेल मंत्रालय से कोई अनुमति नहीं ली गई है इसलिए उन्हें फ्रांस जाने की अनुमति ना दी जाए।

साथ ही विजय गुट द्वारा 14 फरवरी को भारत की फ्रांस एम्बेसी को एक पत्र के माध्यम से कहा गया कि नोर्मंडी फ्रांस में होने वाले इन खेलों के लिए जाने के लिए रणजीत सिंह द्वारा खेल मंत्रालय से कोई अनुमति नहीं ली गई है। जिसके चलते ये टूर को अनधिकृत करार दिया। इस पत्र में 2017 में निशा नेगी (फुटबाल खिलाड़ी) का भी जिक्र किया गया जिसकों SGFI के लापरवाही के चलते जान से हाथ धोना पड़ा था।

क्या है पूरा मामला

फरवरी 2020 में भारतीय स्कूल खेल महासंघ (एसजीएफआई) को कड़ी फटकार लगाते हुए खेल मंत्रालय ने देश के प्रमुख स्कूल खेल निकाय की मान्यता रद्द कर दी थी। साथ ही महासंघ को लापरवाहीपूर्ण व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहराया था । दिसंबर 2017 में एडिलेड में अनधिकृत पैसिफिक स्कूल गेम्स के दौरान एक होनहार 15 वर्षीय फुटबॉलर, निशा नेगी की मौत के बाद से ही SGFI के ऊपर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे।

उसी घटना के दौरान, एथलीटों के 187 सदस्यीय दल के हिस्से के साथ एसजीएफआई द्वारा भेजी गई लड़कियों की हॉकी टीम भी अकेले फंस गई थी। उन्होंने अपने साथ आए भारतीय अधिकारियों/प्रबंधकों पर दुर्व्यवहार और समर्थन की कमी का आरोप लगाया था। मंत्रालय ने अन्य अनियमितताओं के अलावा इन दो घटनाओं को एसजीएफआई को निलंबित करने के पीछे का कारण बताया था।

इसके बाद से ही SGFI दो गुटों में बंट गया था। दिसंबर 2020 में दुबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में वी. रंजीत कुमार को SGFI का अध्यक्ष चुना गया था। बाद में पता चला कि ये चुनाव बिना अध्यक्ष (सुशील कुमार) को बताए करवाये गए। जिसके चलते खेल मंत्रालय ने इस चुनाव को अमान्य करार दिया। ये चुनाव SGFI की कार्यकारी परिषद द्वारा बिना अध्यक्ष की अनुमति के कराए गए थे।

जिसके बाद मार्च 2021 में एक बार फिर चुनाव करवाया गया जिसमें दो बार के ओलंपिक पदक जीत चुके पहलवान सुशील कुमार को स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के अध्यक्ष के रूप में फिर से चुना गया साथ ही विजय संतान को महासचिव चुना गया।

दोनों ही गुट SGFI के नाम का प्रयोग कर रहें है, रणजीत गुट और विद्याभारती ने रायपुर और कानपुर उच्च न्यायालय में खेल मंत्राय के खिलाफ तीन अलग अलग याचिकाएं डाली हैं जो अभी तक लंबित हैं।

खेल मंत्रालय ने पिछले दो वर्ष से रणजीत गुट या संतान गुट में से किसी के खिलाफ या पक्ष में कोई पत्र जारी नहीं किया है ना ही कोई रोक लगाईं है। किसी भी न्यायालय में किसी भी गुट के खिलाफ कोई रोक नहीं लगाई है ना ही किसी के पक्ष में कोई टिपण्णी की है।

SGFI के बैंक अकाउंट और कार्यालय को भी रणजीत गुट संचालित कर रहा है।

चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्कूल खेल संघ (International School Sport Federation) द्वारा रणजीत गुट को मान्यता है और उन्ही खेलों में स्कूली खिलाड़ी भेजने का निमंत्रण आया है इसलिए वह खिलाड़िओं का चयन कर रहे हैं।

इस समय विजय संतान गुट के हाथ में कुछ नहीं है, ना ही रणजीत गुट के खिलाफ उन्होंने किसी भी न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है इसलिए खेल मंत्रालय और फ्रांस दूतावास को पत्र लिखने के अलावा कुछ नहीं है।

खिलाड़ी भुगत रहे खामिआजा

दोनों गुटों की लड़ाई का खामियाजा पिछले 3 साल से खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। दोनों गुटों को इस ओर ध्यान देने की भी जरूरत है। साथ ही खेल मंत्रालय को भी जल्द से जल्द इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए जिससे खिलाड़यों के भविष्य से और खिलवाड़ न हो।

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