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स्कूल गेम्स फेडरेशन की खेल मंत्रायलय को शिकायत

स्कूल गेम फेडरेशन की खेल मंत्रायलय को शिकायत

स्कूल गेम फेडरेशन पिछले कुछ समय से विवादों के घेरे में है। हाल ही में एक बार फिर खेल मंत्रालय को एक शिकायत की गई है।

4 जनवरी 2022 को स्कूल खेल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने 10 खेलों का प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने सम्बंधित पत्र जारी किया था। यह सभी वर्कशॉप 23 जनवरी से 2 फरवरी के बीच कराये जाने हैं। यह पत्र रणजीत गुट द्वारा निकाला गया है। लेकिन दूसरे गुट ने जनवरी को एक पत्र द्वारा खेल मंत्रालय को शकायत की है।

स्कूल गेम्स फेडरेशन की खेल मंत्रायलय को शिकायत

8 जनवरी को दूसरे गुट के विजय संतान ने महासचिव की हैसियत से खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर शिकायत की है कि राजेश मिश्रा, रंजीत कुमार, आलोक खरे और उनकी टीम द्वारा अनधिकृत रूप से ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम करवा रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के पूर्व महासचिव राजेश मिश्रा खेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं।

पत्र में लिखा गया है कि वह स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नाम पर अपनी कपटपूर्ण गतिविधियों से अपने व्यक्तिगत लाभ को पूरा करने की कोशिश कर रहा हैं। खेल मंत्रालय से जांच कराये जाने की मांग की गई है।

आपको बता दें की गत दो वर्षों से स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के गुटों में बट जाने और चुनाव में स्पोर्ट्स कोड नियमो के उल्लंघन के चलते खेल मंत्रालय ने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की मान्यता रद्द कर दी थी। SGFI का एक गुट उच्च न्यायालय भी पहुँच गया जहां अभी भी मामला लंबित है, इतना ही नहीं विद्याभारती के खेल निदेश मुख्तेज सिंह बदेशा ने भी रायपुर उच्च न्यालय में मुकदमा दायर किया हुआ है।

दोनों गुट School Games Federation of India – SGFI का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। ना तो दोनों में से किसी ने भी School Games Federation of India – SGFI का नाम इस्तेमाल करने को लेकर न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है और ना ही मंत्रालय ने किसी भी गुट के पक्ष या विपक्ष में कोई आदेश जारी किया है। न्यालय में लंबित मामलों के चलते खेल मंत्रालय किसी तरह का कोई आदेश जारी कर अपनी किरकिरी कराने से बच रहा है।

भूखे मर रहे खेल प्रशिक्षक

जहां एक तरफ SGFI में विवाद के चलते खिलाड़िओं का भविष्य अधर में है वही कोरोना के चलते कोच भी बेहद परेशान हैं। अधिकतर प्राइवेट स्कूलों ने सभी कोच/प्रशिक्षक निकाल दिए हैं।

क्योंकि कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं और खेल प्रशिक्षण गतिविधियां भी बंद हैं इसलिए इन खेल प्रशिक्षकों की सेवाओं की आवश्यकता भी नहीं रह गई है। अधिकतर सभी स्कूलों ने इन खेल प्रशिक्षकों को बिना वेतन निकाल दिया है, यह बात अलग है की स्कूल बच्चों से पूरी फीस वसूल रहे हैं।

ना तो स्कूलों ने और ना ही किसी सरकार ने इन खेल प्रशिक्षकों की सुध ली है, भूख से मरने की नौबत आने पर सभी प्रशिक्षक अब या तो कोई छोटी मोटी दूकान खोल कर बैठ गए हैं या फिर कहीं छोटी मोटी नौकरी करके अपने परिवार का बामुश्किल गुरजारा कर रहे हैं।

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