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कोरोना स्त्रोत की खोज के प्रकाशन पर चीन सरकार का प्रतिबंध

कोरोना के स्त्रोत की खोज पर चीन सरकार द्वारा प्रतिबंध

चीन सरकार पर उनके देश कोरोना वायरस के संक्रमण के आंकड़े छुपाने का आरोप लगाए जाने के बाद अब उसके स्त्रोत यानि कोरोना संक्रमण की उत्तपति से सम्भंधित शोध के प्रकाशन का आरोप भी लगने लगा है।

पिछले दिनों चीनी विश्वविद्यालयों द्वारा प्रकाशित ऑनलाइन नोटिस के अनुसार COVID-19 की उत्पत्ति पर किसी भी तरह के शोध को प्रकाशित न करने के दिशा निर्देश दिए गए हैं। हालांकि चीन में किसी भी तरह के शोध के प्रकाशन संबंधित अधिकारिओं की जांच के बाद ही सम्भव होता है लेकिन कोरोना वायरस की उत्पत्ति की खोज को विशेष जांच से गुज़रना पड़ेगा।

इस बारे में दो विश्विद्यालयों ने ऑनलाइन सुचना जारी की थी जिसे बाद में हटा दिया गया, लेकिन इंटरनेट पर सूचना का cached संस्करण अभी भी देखा जा सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहे जाने पर चीन ने सख्त ऐतराज़ किया था अमेरिका को चिकित्सा सहायता रोके जाने की धमकी तक दे डाली जिसके बाद ट्रम्प ने चीनी वायरस शब्द का इस्तेमाल करना बंद कर दिया।

जनवरी के अंत से, चीनी शोधकर्ताओं ने प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में कोविद -19 अध्ययनों की एक श्रृंखला प्रकाशित की है। प्रारंभिक कोरोनावायरस मामलों के बारे में कुछ निष्कर्ष – जैसे कि जब मानव-से-मानव संक्रमण पहली बार दिखाई दिया – ने प्रकोप के आधिकारिक सरकारी खाते पर सवाल उठाए हैं और चीनी सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है।

एक चीनी शोधकर्ता के अनुसार ऐसा नहीं लगता की चीन कोरोना वायरस के संक्रमण कि उतपत्ति से संबंधित किसी तरह के शुद्ध को बर्दाश्त करेगा।

कुछ दिन पहले, चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता झाओ लिजियन ने ट्विटर पर एक साजिश को बढ़ावा दिया जिसमे कहा गया था कि कोरोना वायरस अमेरिका में उत्पन्न हुआ था और अमेरिकी सेना द्वारा चीन में लाया गया था।

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