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लॉकडाउन बढ़ना तय – घोषणा कल

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लॉकडाउन बढ़ना तय – घोषणा कल

प्रधानमंत्री की आज राज्य के मुख़्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग द्वारा बैठक हुई, बैठक में अधिकतर मुख्यमंत्रियों ने लॉकडाउन बढ़ाये जाने का समर्थन किया। स्वास्थ मंत्रालय के सूत्रों से अप्रैल के शुरुआत में ही लॉकडाउन बढ़ाने और 12 तारीख को इसकी घोषणा करने की खबरें आ रही थी।

कितने दिन बढ़ेगा लॉकडाउन

लॉकडाउन की अवधि 30 तारीख तक बढ़ाई जा सकती है। सरकार अगले दो हफ्ते स्तिथि पर नज़र बनाये रखेगी। यदि स्तिथि निंत्रण में रहती है तो भी लॉकडाउन विभिन चरणों में खोला जायेगा। गैरज़रूरी संस्थान बंद रखे जाएंगे जैसे की सिनेमा घर, रेस्टॉरेंट, शॉपिंग मॉल, स्कूल, कॉलेज इत्यादि। निर्माण कार्यों, खेलों और भीड़भाड़ वाली गतिविधयों पर प्रतिबंध लगा रहेगा। ओड़िसा, पश्चिम बंगाल और पंजाब सरकार ने पहले ही अपने राज्यों में लॉकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है।

भारत में क्यों धीरे फ़ैल रहा है संक्रमण

हालांकि भारत में कोरोना वायरस देर से आया और समय रहते लॉकडाउन करने से भारत में संक्रमण उतनी तेज़ी से नहीं फैला जितना दुनिया के दूसरे देशो में फैला है। भारत में कोरोना ज़्यादा न फैलने का एक कारण है कि भारत में युवाओं की आबादी दुनिया में सबसे अधिक है। क्योंकि युवाओं का इम्यून सिस्टम यानी की प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होती है इसलिए भारत में अमेरिका या इटली जैसी स्तिथि की संभावनाएं कम ही थी।

भारत में स्टेज 3

सरकार माने या न माने लेकिन भारत में कोरोना वायरस संक्रमण स्टेज 3 में पहुंच चुका है। आज जिस गति से कोरोना वायरस भारत में फ़ैल रहा है उसे और फैलने से रोका जा सकता है। दो ही तरीके हैं, या तो जनता लॉक डाउन को सही मायने में अपनाये अन्यथा सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। राज्य सरकारों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिन्हित कर उन्हें सील किया जा रहा है। केवल ही 30 इलाके चिन्हित कर सील कर दिए गए हैं।

भारत में संक्रमण स्टेज 3 में आने की बहुत बड़ी वजह लोग खुद हैं। आज भी बहुत से लोग समझ रहे हैं की हमे तो नहीं होगा और वो लापरवाही बरत रहें हैं जो की देश के लिया भारी पड़ रही है।

भारत में संक्रमित 8000 के पार

भारत में संक्रमितों की संख्या 8000 हुई, पिछ्के 24 घंटे में 1000 से अधिक मामले प्रकाश में आये, 253 मौतें और 800 के लगभग ठीक भी हुए। महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार ने बड़े पैमाने पर टेस्ट किट का इस्तेमाल कर जांच करनी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के धारावी इलाके में 7.5 लाख टेस्ट करने की शुरुआत कर दी है जबकि दिल्ली सरकार ने 1 लाख टेस्ट करने की बात कही है।

दुनिया की सभी सरकारों ने इस संक्रमण को बहुत हल्के में लिया जिसके गंभीर परिणाम अमेरिका, स्पेन, इटली और फ्रांस जैसे विकसित देशों को भी द्भुगतना पड़ रहा है। दुनिया भर में 17 लाख से अधिक संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिसमे 1 लाख से ज़्यादा मौतें हुई हैं और लगभग 4 लाख लोग ठीक भी हुए हैं।

दवाई बाजार में आने में 1 साल

कोरोना वायरस की दवाई आने में 1 साल तक लग सकता है। किसी भी दवाई की खोज के बाद उसके टेस्ट करने में एक लम्बा समय लगता है। दवाई का टेस्ट पहले चूहों पर फिर इंसानो पर किया जाता है। लेकिन अमेरका एक ऐसा देश है जहां यह टेश चूहों और इंसानो पर समानान्तरण रूप से चलता है इसलिए इस दवाई की खबर सबसे पहले अमेरिका से ही आ सकती है। हालांकि प्लाज्मा तकनीक को भारत के संगठन ICMR ने अनुमति दी है जिससे उम्मीद की कुछ किरण जाएगी है , देखना है आने वाले दिनों में इस तकनीक का कितना फायदा होगा।

केंद्र सरकार के पास पैसे की कमी

भारत सरकार के पास पैसे की कमी होने की वजह से कुछ समस्याएं आ सकती हैं। इसी कमी के चलते पीपीई, मास्क, वेंटिलेटर्स के आर्डर देने में देरी हुई। देश के विभिन भागों से डॉक्टरों ने इसकी शिकायत भी की। हालांकि पिछले कुछ समय में पीएम् केयर फण्ड में एक बड़ी राशि आई है।

कोरोना के बाद भी बड़ी होगी चुनौती

अभी कोई भी इस बात का सही अंदाज़ लगाने में असमर्थ है की इस समस्या से निपटने में देश को या पुरे विश्व को कितना सनी लग सकता है। लेकिन माना जा रहा है कि इस समस्या से निपटने के बाद पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी के दौर से गुज़रना पड़ेगा। विश्वभर में कुछ 52% नौकरियां जाने की संभावना है। अकेले भारत में ही 40-42% लोग आर्थिक रूप कमज़ोर हो चुके होंगे। बैंकों के हालात पहले से ही खराब हैं। जहां मध्यम वर्ग घर और फैक्ट्री का किराया, बैंक की किश्तें और बच्चों की स्कूल फीस के लिए चिंतित है वहीं गरीब वर्ग को खाने की चिंता सत्ता रही है।

इस लॉकडाउन की मार झेल रहे छोटे और मझोले उद्यमी भी सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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